शिक्षा एक ऐसा मापदंड है, जो समाज, संस्कृति, विचारों, अनुभवों, प्रकृति को समझने और जानने में हमारी मदद करती हैं। वर्तमान युग तकनीकी का युग बन गया हैं, जो केवल शिक्षा पर आधारित हैं।
सबसे पहले हम शिक्षा को ही समझ लेते हैं। शिक्षा, ज्ञान के सर्जन का वो रास्ता है, जो मनुष्य के विचारों और संकेतों को एक दूसरे से समझने में मदद करती हैं। शिक्षा, भाषा को समझने का सीधा रास्ता हैं। वर्तमान में शिक्षा के बिना व्यक्ति का कोई इतिहास दृष्टीगोचर नहीं होता हैं। व्यक्ती की सामाजिक, अर्थिक, संस्कृतिक और राजनीतिक समझ बिना शिक्षा के कुछ भी नहीं हैं।
शिक्षा व्यक्ती के जीवन की कलाओं को भाषा के माध्यम से लोगों एवं एक-दूसरे से जोड़ती हैं।
पुराने समय से जब से मनुष्य ने जन्म लिया हैं, शिक्षा भी तभी से उत्पन्न मानी जा सकती हैं। क्योंकि मनुष्य में एक दूसरे की समझ उस समय से ही हो चुकी थी जो शिक्षा का ही एक उदाहरण माना जा सकता हैं। प्राचीन समय में मनुष्य के लिए शिक्षा का मुख्य आधार 'संकेत' बने। उसके बाद जब मनुष्य में समझ बड़ी तब उसने भाषा का उपयोग करना शुरू किया। भाषा का विकास शिक्षा के विकास का मूल रूप सिद्ध हुआ। आज हम विभिन्न भाषाओं को सीखने और समझने में लगे हुए हैं, लेकिन पहले ये भाषाएं सीमित थी क्योंकि लोग एक सीमित दायरे में ही रहना पसंद करते थे, लेकिन जेसे जेसे लोगों की संख्या बढ़ने लगी, लोगों ने विस्तारित होना प्रारंभ कर दिया। जिससे भाषाओं में भिन्नता आने लगी, ये भाषायी भिन्नता ने ही लोगों को बांटने का कार्य प्रारंभ कर दिया। लेकिन लोगों की भावनाएं एक दूसरे से जुड़ी होने के कारण और स्वयं जैसा परिवेश एक दूसरे को जोड़ने का काम करने लगा। इसी समय लोगों को शिक्षा की आवश्यकता पड़ी, क्योंकि भाषाओं को समझना अब जरूरी हो गया था।
वर्तमान में शिक्षा ने ऐसा रूप ले लिया है कि इसके माध्यम से व्यक्ती एक दूसरे को ही नहीं बल्कि पूरे ब्रह्माण्ड को समझने में सफल हो चुका हैं। व्यक्ती की सोच अब स्वयं तक सीमित न रहकर जीवन के रहस्यों तक पहुंच गयी हैं। ज्ञान विज्ञान ने ऐसी प्रगति की है कि व्यक्ति के लिए आज चंद्रमा, सूर्य और अंतरिक्ष की विभिन्न कलाओं की समझ समान्य हो गई हैं।